SSC विरोध - भारत की परीक्षा प्रणाली पर संकट

भारत में सरकारी भर्ती परीक्षाओं की व्यवस्था लगातार विवादों में है। हाल ही में स्टाफ सिलेक्शन कमीशन (SSC) और अन्य सरकारी परीक्षाओं में पेपर लीक, तकनीकी गड़बड़ी और प्रबंधन की लापरवाही के मामले सामने आए। इन घटनाओं ने छात्रों और शिक्षकों को गहराई से प्रभावित किया है।

SSC विरोध - भारत की परीक्षा प्रणाली पर संकट


क्वालिटी-कॉस्ट बेस्ड सिलेक्शन (QCBS) मॉडल और विवाद

सरकार ने हाल ही में एडिक्विटी (Eduquity) को 273 करोड़ रुपये में सरकारी परीक्षाएँ आयोजित करने का ठेका दिया। यह निर्णय QCBS मॉडल के तहत लिया गया, जहाँ क्वालिटी और कॉस्ट दोनों का मूल्यांकन होता है। Eduquity ने अन्य कंपनियों की तुलना में आधी कीमत की बोली लगाई, जिसके कारण उसे यह प्रोजेक्ट मिला।

मुख्य समस्याएँ

1. Eduquity का विवादित इतिहास

2020 में कई परीक्षाओं में धांधली, तकनीकी खराबी और लॉजिस्टिक मिसमैनेजमेंट के आरोप लगे।

मध्य प्रदेश पटवारी परीक्षा और महाराष्ट्र MBA CET जैसी परीक्षाओं में पेपर लीक और परीक्षा रद्द की घटनाएँ हुईं।

2. सस्ती बोली पर सवाल

छात्रों का आरोप है कि कम लागत पर काम लेने वाली कंपनी कहीं और से मुनाफा कमा सकती है।

पेपर लीक, परीक्षा केंद्र बेचने और प्रबंधन में लापरवाही जैसी आशंकाएँ लगातार बढ़ रही हैं।

3. तकनीकी और प्रबंधन की खामियाँ

छात्रों को 500-1000 किमी दूर तक परीक्षा देने भेजा गया।

सर्वर क्रैश, खराब लैब, माउस और कीबोर्ड की समस्या आम रही।

कई परीक्षाएँ आखिरी समय पर कैंसिल कर दी गईं।

छात्रों और शिक्षकों की प्रमुख मांगें

1.  Eduquity को बैन किया जाए और विश्वसनीय कंपनियों जैसे TCS को जिम्मेदारी दी जाए।

2. SSC और अन्य भर्ती परीक्षाओं का कैलेंडर UPSC की तरह पारदर्शी और समयबद्ध बनाया जाए।

3. नॉर्मलाइजेशन प्रक्रिया स्पष्ट और निष्पक्ष हो।

4. हर परीक्षा की वेटिंग लिस्ट जारी हो और भर्ती समय पर पूरी की जाए।

5. पेपर Quality और परीक्षा केंद्रों की व्यवस्था को प्राथमिकता दी जाए।

परीक्षाओं की अव्यवस्था के व्यापक प्रभाव

भारत में लाखों छात्र वर्षों तक मेहनत, आर्थिक संघर्ष और पारिवारिक त्याग के बाद सरकारी नौकरी की तैयारी करते हैं।

पेपर लीक और परीक्षा रद्द होने से उनका समय और विश्वास दोनों खत्म होता है।

तकनीकी गड़बड़ी छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर भी असर डाल रही है।

भर्ती में देरी से युवा बेरोजगारी और अवसाद का शिकार हो रहे हैं।

शिक्षकों और छात्रों का आंदोलन

हाल ही में दिल्ली में छात्रों और शिक्षकों ने DOPT मंत्री से मुलाकात और सुधार की मांग की।

प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने बसों में भरकर हिरासत में लिया।

सोशल मीडिया पर #SSCMismanagement और #SSCVendorFailure जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं।

छात्रों का संदेश साफ है – नौकरी का सपना सिर्फ राजनीतिक बयानों से नहीं, बल्कि पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया से पूरा होगा।

सरकार और आयोग के लिए सुझाव

1. विश्वसनीय कंपनियों को प्राथमिकता दी जाए।

2. परीक्षाओं का डिजिटल और तकनीकी ऑडिट हो।

3. समयबद्ध और पारदर्शी भर्ती कैलेंडर जारी किया जाए।

4. छात्रों की शिकायतों के लिए हेल्पलाइन और त्वरित समाधान प्रणाली बनाई जाए।

FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)

Q1. QCBS मॉडल क्या है?

QCBS (Quality-Cost Based Selection) एक सरकारी टेंडरिंग प्रक्रिया है, जिसमें गुणवत्ता और लागत दोनों का मूल्यांकन कर विजेता कंपनी का चयन किया जाता है।

Q2.  Eduquity विवाद में क्यों है?

 Eduquity पर कई राज्यों की परीक्षाओं में पेपर लीक, तकनीकी गड़बड़ी और मैनेजमेंट फेल्योर के आरोप लगे हैं।

Q3. छात्र क्या मांग रहे हैं?

छात्र चाहते हैं कि  Eduquity को बैन किया जाए, SSC का एग्जाम कैलेंडर पारदर्शी बने और नॉर्मलाइजेशन प्रक्रिया साफ हो।

Q4. इस समस्या का समाधान कैसे होगा?

समयबद्ध भर्ती कैलेंडर, विश्वसनीय वेंडर, और पारदर्शी परीक्षा प्रक्रिया लागू करके ही समस्या हल हो सकती है।

निष्कर्ष

भारत का भविष्य उन लाखों छात्रों पर निर्भर है जो सरकारी नौकरियों के लिए तैयारी करते हैं। यदि परीक्षाओं में लापरवाही, पेपर लीक और अव्यवस्था जारी रही, तो यह न केवल छात्रों का भविष्य बर्बाद करेगी बल्कि देश के प्रशासनिक ढांचे की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े करेगी। सरकार और आयोग को पारदर्शी, सुरक्षित और समयबद्ध परीक्षा प्रणाली को प्राथमिकता देनी होगी।


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