छत्तीसगढ़ के बालोद जिले के डोंडी लोहारा क्षेत्र के एक गाँव में हुई यह घटना एक सच्ची अपराध कथा है, जिसने पूरे क्षेत्र को हिला दिया। गीता निर्मलकर और उसके प्रेमी लेखराम निषाद ने अपने ही ससुर मनोहर निर्मलकर की हत्या की, ताकि उनके अवैध संबंधों में कोई बाधा न रहे।
हत्या की पृष्ठभूमि
गीता और मनोहर के बीच अक्सर विवाद होते थे। इसका कारण था गीता और लेखराम का अवैध संबंध। लेखराम उसी भजन मंडली में गाता था, जिससे गीता जुड़ी हुई थी। मनोहर को यह रिश्ता बिल्कुल पसंद नहीं था, जिसके चलते घर में तनाव बढ़ता गया।
हत्या की शातिर योजना
29 जून को हत्या की साजिश रची गई।
16 जुलाई की रात, मनोहर के नशे में होने का फायदा उठाने का निर्णय लिया गया।
योजना थी कि मनोहर को करंट लगाकर मार दिया जाए, जिससे यह प्राकृतिक मृत्यु लगे।
लेखराम ने इलेक्ट्रिक ग्लव्स और तार का इंतजाम किया, और गीता ने अपने ससुर के गले में लोहे की रॉड रखी।
लगभग डेढ़ मिनट तक करंट देने के बाद भी शरीर पर चोट के निशान रह गए।
सबूत छुपाने की नाकाम कोशिश
चोट के निशानों को छुपाने के लिए शरीर पर हल्दी और गुलाल लगाया गया।
गाँववालों को विश्वास दिलाने की कोशिश की गई कि मनोहर साइकिल से गिरकर मरा है।
जल्दी-जल्दी अंतिम संस्कार करने की कोशिश ने गांववालों को और शक में डाल दिया।
जांच और गिरफ्तारी
गाँव के कुछ पढ़े-लिखे बुजुर्गों ने पुलिस को खबर दी।
पुलिस ने पोस्टमार्टम और फॉरेंसिक जांच करवाई।
जांच में साफ हुआ कि यह साधारण मौत नहीं बल्कि हत्या थी।
गीता और लेखराम ने आखिरकार पूरी साजिश कबूल कर ली और दोनों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया।
सबक और सामाजिक संदेश
यह घटना यह दर्शाती है कि—
कोई भी मर्डर परफेक्ट नहीं होता।
अवैध रिश्ते और घरेलू विवाद अक्सर खतरनाक परिणाम ला सकते हैं।
फॉरेंसिक विज्ञान और गांव की सतर्कता से सच सामने आता ही है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
Q1: गीता और लेखराम ने हत्या क्यों की?
👉 उन्होंने ससुर को रास्ते से हटाने के लिए हत्या की, क्योंकि वह उनके रिश्ते के खिलाफ थे।
Q2: हत्या का तरीका क्या था?
👉 उन्होंने करंट लगाकर हत्या करने की कोशिश की, ताकि यह सामान्य मौत लगे।
Q3: पुलिस को कैसे शक हुआ?
👉 शरीर पर हल्दी और गुलाल, और जल्दी अंतिम संस्कार करने की कोशिश ने गांववालों को शक में डाल दिया।
Q4: क्या दोनों को सजा मिली?
👉 हाँ, पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।
यह सनसनीखेज घटना हमें सिखाती है कि अपराध चाहे कितना भी शातिर क्यों न हो, सच सामने आकर ही रहता है।

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